आयुक्त के बंगले के पास ही नियमों की अनदेखी! कई महीने से चल रही अवैध दुकान पर अब जाकर कार्रवाई…निगम के सबसे बड़े अधिकारी के घर के पास ही कैसे पनपता रहा अवैध निर्माण?
नक्शे के विपरीत बना ‘श्री राम डेकोर्स’ अब सील, लेकिन कार्रवाई में देरी ने खड़े किए कई गंभीर सवाल
बिलासपुर, 24 अप्रैल 2026। शहर में अवैध निर्माण के खिलाफ नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे अभियान के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे निगम तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निगम आयुक्त के बंगले की बाउंड्री से सटी जमीन पर निर्मित ‘श्री राम डेकोर्स’ नाम से दुकान का निर्माण स्वीकृत नक्शे के विपरीत कर लिया गया और पिछले कई महीनों से उसका संचालन भी होता रहा।
हैरानी की बात यह है कि शहर के सबसे संवेदनशील और वीआईपी माने जाने वाले क्षेत्र के मुख्या मांर्ग में यह निर्माण न सिर्फ खड़ा हुआ, बल्कि लंबे समय तक बिना किसी रोक-टोक के चलता भी रहा। शुक्रवार को अचानकन नगर निगम की अतिक्रमण टीम ने कार्रवाई करते हुए दुकान को सील कर दिया।

भवन अधिकारी अनुपम तिवारी ने सीजी न्यूज़ बॉक्स से बात करते हुए बताया कि, जांच में निर्माण नियमों के विपरीत पाया गया, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। इसके साथ ही पेयजल अपव्यय का मामला भी बनाया गया है |
इस पूरे घटनाक्रम ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं।

- क्या निगम का अमला इस निर्माण से अनजान था, जबकि यह स्थल आयुक्त निवास के ठीक बगल में है?
- क्या नियमित निरीक्षण और मॉनिटरिंग की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है?
- क्या शिकायतें होने के बावजूद कार्रवाई टाली जाती रही?
- और सबसे अहम—अगर इतनी महत्वपूर्ण लोकेशन पर 6 महीने तक अवैध निर्माण चलता रहा, तो शहर के अन्य इलाकों में स्थिति क्या होगी?
स्थानीय लोगों के मुताबिक, दुकान में पिछले कई महीनों से लगातार गतिविधि चल रही थी और यहां ग्राहकों की आवाजाही भी बनी रहती थी। ऐसे में यह सवाल और गहरा हो जाता है कि आखिर निगम का जिम्मेदार अमला इतने लंबे समय तक इस पर ध्यान क्यों नहीं दे पाया।
शहर में अवैध निर्माण को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं कि कार्रवाई अक्सर देर से होती है, जब निर्माण पूरी तरह खड़ा हो जाता है और कारोबार शुरू हो जाता है। इसके बाद की जाने वाली कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाती है।

फिलहाल निगम अधिकारियों का कहना है कि अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती की जाएगी। लेकिन इस मामले ने यह जरूर स्पष्ट कर दिया है कि निगरानी तंत्र और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में अभी भी गंभीर सुधार की जरूरत है।










